चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो
जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ... यह हमसे न होगा ! अपने मुँह मियाँ मिट्ठू... वाः वाः...
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डा. अमर कुमार
निट्ठल्ले का फोटोब्लाग
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[08 Sep 2009 14:21 PM]



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