माई नेम इज़ खान, तो क्या?
सत्रह साल, पांच दर्जन से ज़्यादा फिल्में, ढेरों पुरस्कार और बहुत सारा प्यार। दिल्ली के एक लड़के का मुंबई जाकर कामबायी की नई इबारत लिखने का ये एक ऐसा सफर है, जिसे किसी फिल्म की कहानी में आसानी से तब्दील किया जा सकता है। एक मुसलमान लड़के की एक हिंदू लड़की...
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पंकज शुक्ल
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[19 Aug 2009 23:50 PM]



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