ख़ुमार बाराबंकवी की कुछ ग़ज़लें…
ख़ुमार बाराबंकवी
हम उन्हें वो हमें भुला बैठे… ऐसा नहीं के उनसे मुहब्बत नहीं रही… एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिये… वो हमें जिस कदर आजमाते रहे… Posted in कला और संगीत...
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अंकुर वर्मा
कला और संगीत
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[10 Aug 2009 18:38 PM]



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