पत्नी न चाहे तो...

दिल से दिल की बात अभी शçक्त की आराधना का पर्व नवरात्र चल रहा है। सच है, शçक्त के बिना व्यçक्तत्व की कल्पना बेमानी है। शçक्त - वैचारिक, शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, राजनीतिक हर रूप में जरूरी है। इस शçक्त की पहली इकाई पत्नी है, जिसके मिलने के बाद ही व्यçक्त पूर्ण हो पाता है।... [पूरी पोस्ट]
writer manglam
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[25 Sep 2009 15:55 PM]

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