श्री जयराम 'आरोही' की एक कविता "दुःख-सागर"
प्रस्तुत है श्री जयराम 'आरोही' की एक कविता "दुःख-सागर". आप कविता बांचिये.कैसे बारिश लताडती हैसिकुड़े हुए पीले पत्तों को कागज़ की नावों को सड़े हुए गत्तों कोझारखंडी झुरमुटों का लतियाया जानासंवार पायेगा जंगलों को? खिसियाई बिल्ली रोक पाएगी चूहों के दंगलों...
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बालकिशन
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[16 Sep 2009 06:52 AM]



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