अलविदा
उसने कहामैं जा रही हूंहमेशा-हमेशा के लिएतुमसे दूरबस, जो बचे हैं पलवो गुजार लोहंसी-खुशीमेरे संगक्या-खोयाक्या-पायाइसका हिसाबलगा लेनाकलअभी तो हूं मैं तुम्हारेऔर तुम मेरे साथसुनो,जब मैं चली जाऊंगीतुम उदास मत होनारोना भी मतन घंटों बैठ करडूबते सूरज को निहारने...
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शिवराज गूजर.
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[31 Dec 2009 08:33 AM]



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