ख्वाब
उनींदी सी आंखों मेंपलकों के पीछेख़्वाबों में जब तुमचुपके से आए !मेरा मन महकाकदम डगमगाएकानों में आकरजब तुम गुनगुनाये !इन्हीं चंद शब्दों कोसुनने की हसरतहकीकत से हट करक्यूँ ख़्वाबों में लाये !है तुमसे गुजारिशयही बात कहनेहकीकत में आतेक्यूँ ख़्वाबों में आए...
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शिवानी
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[23 Sep 2009 12:22 PM]



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