बादलों से दोस्ती अच्छी नहीं
गुनगुनाती हुई गिरती हैं फलक से बूँदेंकोई बदली तेरी पाजेब से टकराई हैबारिश अब सायोनारा कहने के मूड में आ चुकी है. अब देखिये ना कहीं तो वो सिर्फ दूर से हाथ हिला जा रही है और कहीं ससुराल जाती बेटियों सी फूट फूट कर आँखों से पानी बरसाती हुई. जाती बरसात ने...
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नीरज गोस्वामी
poetry
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[23 Sep 2009 03:49 AM]



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