बादलों से दोस्ती अच्छी नहीं

नीरज गुनगुनाती हुई गिरती हैं फलक से बूँदेंकोई बदली तेरी पाजेब से टकराई हैबारिश अब सायोनारा कहने के मूड में आ चुकी है. अब देखिये ना कहीं तो वो सिर्फ दूर से हाथ हिला जा रही है और कहीं ससुराल जाती बेटियों सी फूट फूट कर आँखों से पानी बरसाती हुई. जाती बरसात ने... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज गोस्वामी

poetry

views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Sep 2009 03:49 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix