महबूबा ..महबूबा ..

काकेश की कतरनें. यदि इस पोस्ट का टाइटल पढ़कर आपको फिल्म शोले की याद आ जाये तो इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है, लेकिन मैं ना तो आज आपको फिल्म शोले का गाना सुना रहा और ना ही अपनी महबूबा के बारे में बता ‘सच का सामना‘ कर अपने एक अदद पत्नी को परेशान ही कर रहा हूँ। [आगे... [पूरी पोस्ट]
writer काकेश

हास्य व्यंग्यमेरे व्यंग्यjammu kashmirpolitical satire

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[29 Jul 2009 00:32 AM]

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