मिलना अजीज़ों का

हृदय गवाक्ष पिछले दिनो मौका मिला दिल्ली जाने का जिस सुबह ९ बजे पहुँची और रात नौ बजे चल दी। मिलना तो बहुत लोगो से था मगर मिल पाई कुछ ही लोगो से। मगर हाँ जिन से मिली उनका मिलना जीवन भर ना भुला पाऊँगी।वरुण की तबीयत के चलते मीनाक्षी दीदी से अक्सर मिलने की बात हुआ करती... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

संस्मरण

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[22 Sep 2009 04:38 AM]

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