बदलाव तो शतरंज का खेल है, शह और मात

एक हिंदुस्तानी की डायरी सामाजिक बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन। सिस्टम बदलना होगा। बीस-पच्चीस साल पहले नौजवानों में यह बातें खूब होती थीं। अब भी होती हैं, लेकिन कम होती हैं। कितनी कम, नहीं पता क्योंकि बड़े शर्म की बात है कि हम अब बुजुर्ग होने लगे हैं। हालांकि मानने को जी नहीं करता,... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल रघुराज

अंदर की दुनिया

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[20 Aug 2009 01:05 AM]

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