दिल्ली की बसों में सेफ नहीं है 'लड़कों' की इज्ज़त

दरबार-ए-जालिम समलैंगिकता पर बहस छिडी तो पुरानी पीढी ने नये दौर के बच्चों पर संस्कृति को खराब करने के आरोप लगाने में जरा भी रहम किया. लेकिन अगर आप दिल्ली की सड़कों पर सार्वजानिक वाहनों पर निर्भर होकर निकल जाएँ तो हकीकत नजर आज जायेगी. पहले मुझे लगता था की छेड़खानी की... [पूरी पोस्ट]
writer SUNIL DOGRA जालि‍म
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[08 Sep 2009 09:21 AM]

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