अन्धेरी रात उसने भी

लम्हें जिन्दगी के परिन्दो को कभी क्या , माँ ने उड़ना सिखाया था , उन्हे तो बस किसी शाख से गिरकर बताया था । तुम्ह भी चुप चाप चले आये हो महफ़िल से , तुम्हे भी क्या उसी ने जाम पिलाया था । हमे अब गम से दहशन नहीं कोई, मिला के दर्द ,जाम खुशी का पिलाया था । शहर की गलियों के [...]... [पूरी पोस्ट]
writer hemjyotsana "Deep"

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[02 Aug 2009 10:40 AM]

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