मासूमियत के हनन की तस्वीर
उम्मीदों और खुशियों से भरीएक मीठी सी धुन गाता हुआ वहचलाये जा रहा थाहाथो को सटासट...कभी टेबिल तो कभी कुर्सी चमकाते छलकती कुछ मासूम बूँदेंसुखे होंठों को दिलासा देती उसकी जीभखेंच रही थी चेहरे परउत्पीड़न से मासूमियत के हनन की तस्वीरमगर फ़िर भीयन्त्रचालित साहर...
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सुनीता शानू
कविता सुनीता शानू
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[19 Aug 2009 09:48 AM]



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