अपना सवाल जवाब
गोपाल प्रसाद की एक कविताजब यही अपराध है किचोर को चोर न कहूंतो मैं सहर्ष यह अपराध करूंगाधरूंगा हर उस जगह कदमजहां धरना जरूरी हैआम को आमऔर वाम को वामउस समय तक कहूंगाजब तक मेरी जीभ मेरे पास हैकैसा समय आ गया है किप्रतिवाद बर्फ बन गया हैसुना नहीं आपनेपैसेंजर...
[पूरी पोस्ट]
Satyendra Prasad Srivastava
गोपाल प्रसाद का पन्ना
7
0
0
0
0
[07 Aug 2009 11:29 AM]



Shuffle








