झूमता हुआ नया साल फ़िर आया....

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** नया सालएक नई आशानई उम्मीद जगाता हुआकलेंडर के पन्नों परउतर आता हैऔर कुछ दिन तोअपने नयेपन के एहसास सेकुछ तो अलग रंग दिखाता है....फिर ढलने लगते हैं लम्हेवक़्त यूँ ही गुजरता जाता है ....कुछ नया होने की आस मेंयह जीवन यूँ ही बीतता जाता हैनए साल की सबको बहुत... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

बाल कविता

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[31 Dec 2009 02:07 AM]

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