आसमानी फूल

रजनीगन्धा सेतू के किनारे खिले थेकुछ आसमानी फूल,पानी में बिम्बित थासुनहरी आकाश अपार,मैंने आकाश की असीमताउठा के दी थी तुम्हे,तुम्हारी असीमता में मुझे मिलेकुछ फूल उपहार में,आँगन में मेघदूत मिलेकाले और बौराए से,औरसंदेसों की झारी मेंगुलाब की कुछ पाँखुरी पड़ीकाली स्याह... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
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[18 Sep 2009 07:00 AM]

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