हाय गज़ब ! कहीं तारा टूटा

प्रत्यक्षा पलथी मार कर बैठीं मुन्नी दीदी के चेहरे पर हँसी दौड़ रही थी । जैसे कोई छोटा बच्चा चभक कर उनके चेहरे पर आ बैठा हो । कोई किस्सा सुना रही थीं और उस किस्से के होने की याद में , बोलने के पहले ही उनका शरीर उस हँसी में बार बार डोल जाता । मैं ज़रा मुस्कुराती , उस... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[17 Sep 2009 01:21 AM]

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