तेरा खुदा जो कह रहा...
तेरा खुदा जो कह रहा, मेरा खुदा नही मानता।आदमी को आदमी, कोई नही, यहाँ मानता।रूतबों औ’ धन से यहाँ, आदमी का मोल है,आदमी का दिल यहाँ कोई नही पहचानता।अपनी ही धुन में यहाँ ,चल रहे सब बेखबर,कितनें गुल पैरों तले, कुचलें, नहीं कोई जानता।देख सुन खामोंश है दुनिया...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[22 Sep 2009 19:54 PM]



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