खामोश निगाहों का सपना तुम हो
खामोश निगाहों का सपना तुम हो,जिसको भुला न सकूं, वो अपना तुम हो,जिसकी हर बात, मेरी तन्हाईयों को छू ले,सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,वो तुम हो, वो तुम हो।जिसकी धङकन की आवाज़,सिर्फ मैं सुनूं ,दिन और रात,जिसके आने की राह तकें,ये आंखे बार-बार,जिसकी खुशबू का...
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Neeraj
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[04 Sep 2009 13:32 PM]



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