मंहगाई ऒर नया साल

नया घर मंहगाई ऒर नया-साल-विनोद पाराशर-हमने कहा-नेताजी! मंहगाई का हॆ बुरा हालबीस रुपये किलो आटाअस्सी रुपये दालमुबारक हो नया साल.देसी घी का दिया-सिर्फ प्रभु के सामने जला रहे हॆंऒर-हम खुद!सूखे टिक्कड चबा रहे हॆं.बच्चों को-दूध नहीं/चाय पिला रहे हॆंरो-धोकर-गृहस्थी... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद पाराशर

हास्य-व्यंग्य

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[31 Dec 2009 12:56 PM]

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