कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात "अंतर"तुम्हारीऔरमेरी सोच मेंकेवलइतना अंतर हैतुमजीवन टुकड़ों मेंजीते होमैंसमग्रता मेंतुमसंबंधमतलब केरखते होमैंअंतरंगता केनिःस्वार्थतुमकेवलअभी कीसोचते होमैं दूर कीयदि ये सबभागम-भागतोड़-फोड़धोखा-धड़ीतुमकेवलअर्थ के लियेकरते हो तोअर्थ तोवेश्या के पास भीहोता हैपर... [पूरी पोस्ट]
writer ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[04 Sep 2009 07:00 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix