पत्थरों का गीत

हृदय गवाक्ष ८ साल पहले एक पत्थर की आँख में आँसू देख कर ये कविता लिखी थी। बाद में ये कुछ लोकल पत्रिकाओं में छपी भी। मगर जैसा मैने लिखा था वैसा इसे समझा नही गया। इसलिये ब्लॉग पर लगाने का मन नही हुआ। बहुत दिनो बाद फिर अभी पिछले रविवार इस गीत को फिर किसी पत्थर के सामने... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

कविता

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[17 Aug 2009 03:16 AM]

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