कितने काग कबूतर भेजूँ, इक खत हर पल होता है।

हृदय गवाक्ष ये गीत जिसे मैने गज़ल बनाया था, अचानक जैसे पैदा हो गया था। कमज़ोर गणित के कारण बिल्स सम्मिट करने का काम हमेशा मुझे तनावपूर्ण ही लगता है और उस तनाव में अचानक जाने कहाँ से इन्हे जन्म लेने की ज़िद आ गई। मैं मना कर रही हूँ, मगर ये बस अभी की जिद लगाये पड़ी है।... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

कविता

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[28 Aug 2009 06:28 AM]

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