खबर भी है ?

दिल का दर्पण -  परावर्तन जा बसे हो दूर तुमपर याद रखनावास्ता जिससे तुम्हारावो एक घरइधर भी हैरास्तों को पार करपा गये मंजिल को तुमरह गई सूनी सी जोवो रह-गुजरइधर भी हैरिश्ता है आंसुओं का मेरेयाद से तेरी किस कदरजानते हैं सब मगरक्या कुछ खबरउधर भी हैरोकने से भी मेरेवक्त रुकता ही... [पूरी पोस्ट]
writer मोहिन्दर कुमार

कविता

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[18 Sep 2009 03:17 AM]

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