दुर्गा पूजा-तस्वीरें और यादें

अनुभव बचपन के दिनों में दुर्गा पूजा में हम हॉस्टल से घर आया करते थे। बाद में इसके साथ मेला घुमने का भाव भी जुड़ा लेकिन ऐसा काफी कम दिन ही हो सका। पढ़ाई और फिर नौकरी के चक्कर में पूजा मंडपों से उठने वाली धूप की सुगंध और कलश के नीचे उगने वाली जयंती हमसे दूर होती... [पूरी पोस्ट]
writer गिरीन्द्र नाथ झा
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[26 Sep 2009 06:05 AM]

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