हॉस द्स वेंएस - मधुशाला
लम्बे अरसे बाद क्लौदिया की किताब पब्लिश हो ही गयी.. २ साल पहले उन्होंने मधुशाला की रूबाइयों का अनुवाद अपनी जर्मन भाषा में लिखा और हर रूबाइयों पर चित्र भी बनाये हिंदी के प्रति उनका यह प्रेम अनूठा है वह हिंदी सीखती हैं और पढ़ती भी हैं.. बच्चन साहब की...
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विजेंद्र एस विज
कला और साहित्य
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[22 Aug 2009 07:06 AM]



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