एक बारिश की शाम
औरत का दिल ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि हर वक़्त प्यार के खुमार में डूबा रहता है कुछ नया खोजता सा ,कुछ नया रचता सा। रजनीश ज़ी के लफ़्ज़ो में .. सारी तहज़ीब स्त्री के आधार पर बनी,घर ना होता तो, नगर ना होते ... नगर ना होते ,तो तहज़ीब ना बनती ...मर्द और औरत...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[28 Aug 2009 23:02 PM]



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