प्यार का प्रतिदान
धरा का रूप धरेउजाला तुझ सूरज से पातीतेरे बिना सजना मैंश्याम वर्ण ही कहलातीपाती जो तेरे प्यार की तपिशतो हिमखण्ड ना बन पातीधूमती धुरी पर जैसे धरतीयुगों युगों तक साथ तेरा निभाती मन की अटल गहराई सिंधु सीहर पीड़ा को हर जातीसृष्टि के नव सृजन सीख़ुद पर ही...
[पूरी पोस्ट]
रंजना [रंजू भाटिया]
11
0
0
0
0
[08 Sep 2009 08:34 AM]



Shuffle








