तुम क्यूँ जिन्दा हो......
दूसरों का दुख देख करआँख तब तक नही रोतीजब तक कोई पीड़ातुम्हारे भीतरपहले से नही सोती।इस समुंद्र के किनारेरेत में क्या खोज रहे होउसे नही पाओगे।समय की लहरेंहमेशा की तरह उसे बहा करअपने साथ ले गई होगींकहीं दूर, बहुत गहरे में,किसी पत्थर के नीचे पड़ी या दबीवह...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[02 Aug 2009 20:58 PM]



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