वक्त से आगे वक्त से पीछे

दिशाएं बहुत भागा ......वक्त के साथ हो लूँ।लेकिनहमेशा पीछे छूट जाता हूँ।वक्त से हारने पर,अपने को सताता हूँ।लेकिनअब मैने वक्त के पीछे दोड़नाछोड़ दिया है।उस से मुँह मोड़ लिया है।अब वक्त परबिछोना बिछा करउस पर लेट गया हूँ।वक्त जहां चाहता है ,मुझे ले जाता है।अब मुझे... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

परमजीत बाली

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[09 Sep 2009 14:32 PM]

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