लुटते हुए देश को बचाओ साथियो !

नया घर लुटते हुए देश को बचाओ साथियों!कदम से कदम मिलाओ साथियों,लुटते हुए देश को बचाओ साथियों.कोना-कोना देश का जल रहा हॆ,शासन-तंत्र जनता को छल रहा हॆ,कॆसी-कॆसी चालें यह चल रहा हॆ,अंधेरे में रहे क्यों?बताओ साथियो,लुटते हुए देश को बचाओ साथियो.इधर देखो कुत्ता... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद पाराशर

गीत

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[16 Aug 2009 09:07 AM]

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