ऐसा क्यों लगता है मुझे....

mahua कभी कभी मुझे लगता है....जैसे......शायद मेरी ही आंख की भीगी कोर बासी हो गयी....या फिर इन आंसुओं में उतना नमक नहीं रह गया....जो तुम्हारे सिर्फ एक बार मुस्कुराने की मेरी इल्तिज़ा को तुम तक पहुंचा सके......मैं नहीं जानती.....पर ना मालूम क्यों ये लगता... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi

तुम....

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[10 Aug 2009 15:01 PM]

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