क्योंकि तुमसे मैं प्रेम नही करता

आर्जव यह समयतुम्हारे आने का था !और तुमनहीं आये !!!वैसे तो व्यस्त था मैंअपने कामों में –जैसे रोज रहा करता हूंलेकिन फिर भीमेरे अन्दर से कहींकोई भीतरी अदृश्य देहबार बारमेरी इस देह से निकलबाहर उस सीढी़ की तरफ़ढ़ुलक ढ़ुलक जा रही है !हर बार खुद को बांधता हूं कसकस... [पूरी पोस्ट]
writer Aarjav
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[03 Oct 2009 04:09 AM]

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