व्यंग्य-कक्ष में *****अगर तुम न होते*****
व्यंग्य का शौक उन्हें बचपन से था। हर आदमी को अपना कार्य क्षेत्र व प्रतिबद्धताएं तय करनी पड़ती हैं। जब वे तीन वर्ष के थे तभी उन्होंने निश्चय कर लिया था कि लोग अगर मानसिक विकृतियों व सामाजिक विद्रूपताओं पर व्यंग्य लिखते हैं तो मैं लोगों की शारीरिक...
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sanjaygrover
व्यंग्य
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[06 Aug 2009 10:06 AM]



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