‘व्यंग्य-कक्ष’ में पढ़िए **साहित्य में आतंकवाद** श्रृंखला का चौथा व्यंग्य

samwaadghar ***** बिना जुगाड़ के छपना*****+++++++++++++++++++++++++++++++कस्बे में यह खबर अफवाह की तरह फैल गई कि एक नवोदित लेखक एक राष्ट्रीय अखबार में बिना किसी जुगाड़ के छप गया। सभी हैरान थे कि आखिर यह हुआ कैसे। तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। कोई कहता कि यह... [पूरी पोस्ट]
writer sanjaygrover

व्यंग्य

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[11 Aug 2009 02:57 AM]

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