क्या हमें ‘सच का सामना’ नहीं ‘सच का परदा’ चाहिए !?
नैतिकता पर बहस शायद आज की सबसे मुश्किल बहस है। क्योंकि ज़्यादातर लोग ‘चली आ रही नैतिकता’ पर अड़े रहते हैं, भले व्यवहार में इसका उल्टा करते हों। थोड़े-से लोग नैतिकता के नियमों को बदलने की कोशिश करते हैं। उनमें से कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें पुराने नियम अमानवीय...
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sanjaygrover
दोहरे मानदण्ड
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[15 Aug 2009 07:53 AM]



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