"आई हेड ए वेरी लांग डे!....."

काहे को ब्याहे बिदेस.... उसकी आँख खुली और घड़ी की और मुड़ गई... कमरे के भीतर अँधेरा वैसा ही बिखरा पड़ा था जैसे सोने से पहले था... इस मौसम में सूरज का अलार्म बजने से कोई लेना-देना नहीं है और ना ही सूरज ने रौशनी देने की गारंटी दी है की वह स्कूल और आफिस बंद होने तक रौशनी देता... [पूरी पोस्ट]
writer neera
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[07 Sep 2009 05:10 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix