कत्ल से पहले बहनें...बहनों के कत्ल के बाद
गांव से लौटा हूं...हरियाणा के गांव से...उसी हरियाणा के गांव से जहां लड़कियों का कत्ल जारी है...इज़्ज़त की बलिवेदी पर...कत्ल से पहलेबहनें सुबह हैंसुबह की चौखट पर फुदकती चिड़िया हैंचिड़िया के परों पर ओस का कतरा हैंकतरे के भीतर गीली रोशनी हैंरोशनी का फैलता...
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विवेक
कविता
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[27 Jul 2009 06:46 AM]



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