डर जाओ, अब वह मरने के लिए तैयार है
-------------------------------------------------------------सुना तुमने,इस बार उसने मुंह चिढ़ाती भूख कोधमकाकर भगा दिया है।हालात के पंछीउसके घर के सामने वाले बरगद पर नहीं हैंआज सुबह से।कल रात से मजबूरियां भी रोती सुनाई नहीं दीं।बताते हैं, कई रोज हुएसूख...
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विवेक
कविता
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[11 Sep 2009 06:46 AM]



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