सॉसें जैसे रूक-रूक कर आ रही थी

चलते-चलते आज 'अथर्व' का प्ले-स्कूल का चौथा दिन पहले,दूसरे और तीसरे दिन तो वह हमारे साथ गया सो ना-नुकूर करते चला ही गया, चौथे दिन उसे वैन में जाना था हम दोनों सहमें हुए थे आखिर वह समय आ गया वैन के पास हम दोनों खड़े 'अथर्व' अपनी मिमी-मॉ की गोदी में मैंने कहा बेटा जाओ... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल सि‍द्धार्थ

आप-बीती

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[31 Jul 2009 23:53 PM]

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