कुछ नहीं है सिवाए यादों के ...
एक तो गर्म मौसम और ऊपर से ये बेवजह की मसरूफियत,बहोत दिनों तक आप सभी से दूर रक्खा ॥ इस देरी के लिए आप सभी से मुआफी चाहता हूँ ...पर एक बात है गूरू जी के छड़ी में बहोत आनंद है ... गूरू जी के आर्शीवाद से ये ग़ज़ल आप सभी के सामने पेश करने लायक बन पड़ी ... तो...
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"अर्श"
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[14 Sep 2009 05:31 AM]



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