मां के हाथों की रोटियों की महक ...

prosing लंबे समय के बाद एक छोटी बह'र की ग़ज़ल कहने की कोशिश की है जिसे आर्शीवाद परम आदरणीय गूरू देव ने दिया है ... आप सभी के सामने इसे रख रहा हूँ प्यार और आर्शीवाद के लिए... बह'र .... २१२२ १२१२ ११२मुस्कुराकर वो जब बुलाए मुझे ,हादसे पास नज़र आए मुझे ॥ मेरा ईमान... [पूरी पोस्ट]
writer "अर्श"
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[13 Aug 2009 11:44 AM]

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