तेरे शिकवे बहुत नाजुक हैं..
बजाय इसके मैं कुछ कहूँ...हद ये है के कुछ कह नहीं सकता ...एक छोटी सी रचना है मन में बहुत उधेड़बुन के खिलाफत के बाद आप सभी के पास रख रहा हूँ जो शायद पसंद ना भी आए ... मगर इससे पहले एक शे'र कहूँगा जो श्रधेय मुफलिस जी के लिए बरबस ही जबान पे आगया था .... और...
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"अर्श"
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[25 Aug 2009 08:37 AM]



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