"यादों की इक रेल चली..."
बस ऐसे ही एकांत में बैठा था मै की अन्तरमन कुछ पाने को व्यग्र सा हो रहा था। मैंने उसी समय अपनी कलम उठा ली और भावनाओ को एक पन्ने पर दर्ज कर दिया............. उसी एहसास की बातें अब आप लोगों के सामने यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.............यादों की इक रेल चली...
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लोकेन्द्र
"मेरी कविताएँ..."
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[07 Sep 2009 08:21 AM]



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