"एक सबक हमने सीखी अब आप भी सीखों भाई..."
कहतें हैं ठोकरे इन्सान को चलना सीखती हैं। इसका उदाहरण बचपन से ही मिलता चला आ रहा है। जब अपने बडों से ज्ञात होता है की बचपन में पहला कदम बढ़ाने से पहले हमने कितनी ठोकरे खायी है। जिसका सबूत भी शायद शरीर के किसी भाग पर किसी पुराने चिन्ह के रूप में दिख जाता...
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लोकेन्द्र
'बस यूँ ही...'
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[12 Sep 2009 12:32 PM]



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