"तोहफा..."
ये रचना मैंने अपने लखनऊ विश्वविद्यालय में दोस्तों के मस्ती के साथ बीती जिंदगी के दौरान लिखी थी, जो डायरी के पन्नो में नीचे दबी पड़ी थी। आज जब नजरो के सामने मिली तो उन्ही एहसासो को आपके सम्मुख प्रस्तुत कर दिया.......वो बचपन के छूटे हुए पलवो हंसते हुए गुजरा...
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लोकेन्द्र
"मेरी कविताएँ..."
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[02 Oct 2009 10:27 AM]



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