मादरे हिन््द के चेहरे पे अभी उदासी है वही

बकौल बेद आजादी के दिन बस यही...कौन आजाद हुआकिसके माथे से सियाही छूटीमेरे दिल में अभी दर््द है महकूमी कामादरे हिन््द के चेहरे पे अभी उदासी है वही... [पूरी पोस्ट]
writer वेद रत्न शुक्ल
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[14 Aug 2009 15:44 PM]

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