श्री राजेंद्र यादव के नाम एक खुला पत्र

प्रेम जनमेजय आदरणीय श्री राजेंद्र यादव जी, परनाम, साहित्य के इस तथाकथित असार संसार में ‘हंस’ को पढ़ने/देखने के, ‘जाकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरति देखी तिन तैसी’ के अंदाज में अनेक अंदाज हैं। कोई साहित्यिक संत इसकी कहानियों के प्रति आकार्षित हो संत भाव से भर जाता है,... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेम जनमेजय
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Sep 2009 22:41 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix