ग़ज़ल : कभी जागीर बदलेगी कभी सरकार बदलेगी
कभी जागीर बदलेगी, कभी सरकार बदलेगी ।मग़र तक़दीर तो अपनी बता कब यार बदलेगी ?अगर सागर की यूं ही प्यास जो बढती गई दिन दिन,तो इक दिन देखना नदिया भी अपनी धार बदलेगी ।हज़ारों साल में जब दीदावर होता है इक पैदा,ऒ ! नर्गिस अपने रोने की तू कब रफ़्तार बदलेगी ?सदा कल...
[पूरी पोस्ट]
शरद तैलंग
8
0
0
0
0
[01 Sep 2009 13:30 PM]



Shuffle








